प्रतिभास्थली के पूज्य प्रेरणा स्रोत हैं धरती के देवता, हम सब के आराध्य, जैन व अजैनों के भगवान्, चेतन-अचेतन कृतियों के सृजेता, इन्द्रियसुख विजेता, मोक्षमार्ग के प्रणेता आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज।
महामनीषी दिगम्बराचार्य 108 विद्यासागरजी महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में गहराते सघन अंधकार को मिटाने के लिए, प्राचीन व आधुनिक संस्कृति की संवाहक प्रतिभास्थली का सृजन कर अपने दिव्य प्रकाश से हृदय के गहनतम अँधेरे कोनों में प्रकाश भरना आरम्भ कर दिया।
प्रतिभास्थली के पूज्य प्रेरणा स्रोत हैं धरती के देवता, हम सब के आराध्य, जैन व अजैनों के भगवान्, चेतन-अचेतन कृतियों के सृजेता, इन्द्रियसुख विजेता, मोक्षमार्ग के प्रणेता आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज।
महामनीषी दिगम्बराचार्य 108 विद्यासागरजी महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में गहराते सघन अंधकार को मिटाने के लिए, प्राचीन व आधुनिक संस्कृति की संवाहक प्रतिभास्थली का सृजन कर अपने दिव्य प्रकाश से हृदय के गहनतम अँधेरे कोनों में प्रकाश भरना आरम्भ कर दिया।
प्रतिभास्थली के पूज्य प्रेरणा स्रोत हैं धरती के देवता, हम सब के आराध्य, जैन व अजैनों के भगवान्, चेतन-अचेतन कृतियों के सृजेता, इन्द्रियसुख विजेता, मोक्षमार्ग के प्रणेता आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज।
महामनीषी दिगम्बराचार्य 108 विद्यासागरजी महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में गहराते सघन अंधकार को मिटाने के लिए, प्राचीन व आधुनिक संस्कृति की संवाहक प्रतिभास्थली का सृजन कर अपने दिव्य प्रकाश से हृदय के गहनतम अँधेरे कोनों में प्रकाश भरना आरम्भ कर दिया।
प्रतिभास्थली के पूज्य प्रेरणा स्रोत हैं धरती के देवता, हम सब के आराध्य, जैन व अजैनों के भगवान्, चेतन-अचेतन कृतियों के सृजेता, इन्द्रियसुख विजेता, मोक्षमार्ग के प्रणेता आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज।
महामनीषी दिगम्बराचार्य 108 विद्यासागरजी महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में गहराते सघन अंधकार को मिटाने के लिए, प्राचीन व आधुनिक संस्कृति की संवाहक प्रतिभास्थली का सृजन कर अपने दिव्य प्रकाश से हृदय के गहनतम अँधेरे कोनों में प्रकाश भरना आरम्भ कर दिया।
मनुजो मानवो भूयात्। भारतः प्रतिभारतः॥
मनुष्य बुद्धि व गुणों के विकास और संस्कारों के संवर्धन से मानव बने और भारत प्रतिभा में निमग्न हो।
शिक्षा आदर्शों का निर्माण करे, “शिक्षा का उद्देश्य जीवन का निर्वाह नहीं निर्माण है।”
मानव को मानव बनाने की जो कला हमारे गुरूकुलों में मिलती थी उससे कई देशों व राष्ट्रो ने शिक्षा प्राप्त की है इसी गुरुकुल परंपरा की परछाई है हमारी “प्रतिभास्थली”।
“शिक्षा का उद्धेश्य हित का सृजन, अहित का विसर्जन है ।” -आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज
शिक्षा का लक्ष्य मात्र पड़ना लिखना नहीं अपितु जीवन का नैतिक विकास भी है । यहाँ विज्ञान, गणित, भूगोल आदि विषयों के पारिभाषिक शब्दों का ज्ञान अंग्रेजी तथा हिंदी दोनों भाषाओँ में कराया जाता हैं। छात्राओं के बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ प्रायोगिक ज्ञान हेतु विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
संपर्क करें
प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ
चन्द्रगिरि तीर्थक्षेत्र डोंगरगढ़
जिला-राजनांदगाव (छत्तीसगढ़)491445
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